बच्चों की सफलता माता-पिता के त्याग की देन: उपायुक्त

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जीवन एक हवन की तरह है, जो बिना मेहनत और त्याग के यज्ञ पूरा नहीं होता। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वह मेरा सम्मान नहीं बल्कि मेरी मां के संघर्षों और सैक्रिफाइज का नतीजा है। यह भावुक उद्गार चाईबासा के उपायुक्त मनीष कुमार ने कोल्हान विश्वविद्यालय सभागार में हिन्दुस्तान अखबार द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

उपायुक्त ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए युवाओं और बच्चों को जीवन में सच्चे और जिम्मेदार इंसान बनने की सीख दी। उन्होंने कहा कि दिखावे की नहीं, संस्कारों की जरूरत है। आज के शिक्षा तंत्र और आधुनिक युग पर बात करते हुए कहा कि बच्चों को सिर्फ किताबें थमा देने से उनका विकास नहीं होता। बच्चों को समाज का जिम्मेदार नागरिक बनना होगा।

जीवन में ईमानदारी की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि जीवन में हमेशा सही बोलिए, सत्य के साथ रहिए। दोमुंहा व्यवहार मत कीजिए। अक्सर लोग अंदर कुछ और बाहर कुछ और बोलते हैं, इस आदत से बचना होगा। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन सफलता तभी मिलती है, जब आप निरंतर मेहनत करते हैं। जब कोई व्यक्ति सफलता की सीढ़ी चढ़ रहा होता है, तब उसकी मेहनत को कोई नहीं देखता। लेकिन जब वह शीर्ष पर पहुंच जाता है, तो सब देखते हैं। इस पूरी यात्रा के पीछे माता-पिता का बहुत बड़ा त्याग होता है। युवाओं को संदेश दिया गया कि वे माता-पिता के इस योगदान को कभी न भूलें, उनका हमेशा सम्मान करें और उनकी सेवा करें।

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